अमृत महोत्सव और हिंदी - डाक्टर शंकर

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utkarshexpress.com मदुरै (तमिलनाडु) - हमारा भारत 1947 में आजाद हुआ। हम करीब पांच सौ साल की गुलामियत में रहे। हमें आजादी भी आधी रात में प्राप्त हुई। आजकल की पीढ़ी को स्वतंत्रता का मूल्य जितना मालूम होना था उतना नहीं हो रहा है। असल में कल्पना करके देखें तो मालूम होगा। अंग्रेज़ी सरकार के शासन में स्वतंत्र रुप से बोलने, लिखने और अन्य लोगों से मिलने के लिए भी पाबन्दी बनी हुई थी। 
मनुष्य को जिन जिन चीजों की जरुरत होती आई है, उन्हें पाने के लिए कुछ न कुछ करना पड़ता है। देश की आजादी के लिए राष्ट्र पिता महात्मा गांधी जी ने हमारे देश के लिए हिंदी भाषा को चुना। एक-एक इन्सान की जैसे मां होती हैं इसी तरह हमारे देश की मातृभाषा भाषा हिंदी हर घर में आज बोलने की आवश्यकता है। सब को हिन्दी भाषा जानना चाहिए। हिंदी भाषा बोलने में हम सब आगे बढ़ कर काम करें एवं  पूरे विश्व में हिंदी भाषा को जन-जन तक पहुंचाने का अभियान चलाएं तभी आजादी के अमृत महोत्सव की सार्थकता सिद्ध होगी। 
- डाक्टर शंकर, मदुरै तमिलनाडु, फोन -8754126034

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