वश नहीं है हमारा हृदय दाह पर - अनुराधा पाण्डेय

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साँस ही रुक गई, प्राण रूठा रहा ।
#रात_यूँ_ही_कटी_मात्र_मनुहार_में

एक क्षण में लगा कल्प वनवास-सा ।
भग्न उर में उठा एक उछवास-सा ।
बोल तेरे लगे शुष्क जब भी शुभे...
अर्थ ही खो गया अद्य संसार में। 
साँस ही रुक गई प्राण रूठा रहा ।
#रात_यूँ_ही_कटी_मात्र_मनुहार_में

यूँ  लगे आ गया एक क्षण में प्रलय ।
खोजता रह गया चिर निलय हत प्रणय ।
हो गई क्षण विमुख पग विपथ जब हुए....
सार ही यूँ लगा मर गया प्यार में। 
साँस ही रुक गई प्राण रूठा रहा ।
#रात_यूँ_ही_कटी_मात्र_मनुहार_में.....

मौन तेरा निमिष भी व्यथा घोर है ।
चिर प्रणय से बधा द्वय हृदय छोर है ।
मन वहीं है सतत अश्रु रुकते नहीं....
हार जिसको गया वो न अधिकार में। 
साँस ही रुक गई प्राण रूठा रहा ।
#रात_यूँ_ही_कटी_मात्र_मनुहार_में
- अनुराधा पाण्डेय द्वारिका , दिल्ली 
 

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