बाबा तुम देवाधिदेव हो - कालिका प्रसाद

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दिव्य  हिमालय में धाम तुम्हारा,
सौम्य काशी में नित वास विश्वनाथ।
मां भागीरथी तट पर विराजित हो,   
जय-जय -जय  हो काशी विश्वनाथ।

देवों  के    महादेव   हो   बाबा,
भक्तों के  तुम   कष्ट   हरते   हो।
जो भक्त उत्तरकाशी धाम पर आता ,
उसकी हर मनोकामना पूरी होती।

तन   पर   भस्म    रमाये   हो  बाबा,
कर   में    त्रिशूल   डमरू  धारी  हो।
जल  धारा    शिवो  अति  प्रिये,
अश्रु धारा से भी सन्तोष होते हो।

बाबा विश्वनाथ तुम देवाधिदेव हो 
जन  - जन    को  समृद्धि  देना।
प्रगति पथ  आगे बढ़े भक्त गण,
बाबा   सबको   सद् बुद्धि  देना।

निश दिन ध्यान तुम्हारा करते बाबा,
तुम ही मंगलकर्ता काशी विश्वनाथ  ।
चलती   रहे   श्वासों   की  माला,
विश्वनाथ तुम्हें कोटि- कोटि  प्रणाम।

कालों  के  तुम   महाकाल हो बाबा,
तुम    त्रिशूल    धारी   हो भोलेनाथ।
इतनी   करुणा   करना विश्वनाथ, 
हर  श्वास में तुम्हारा  ही सुमिरन हो।
- कालिका प्रसाद सेमवाल
मानस सदन अपर बाजार
रुद्रप्रयाग उत्तराखंड
 

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