चौपाई छंद - मधु शुक्ल 

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जीवन सुख दुख का संगम है ।
जो रहता दोनों मे सम है ।। 
संसार उसी को रुचता है।
जन मन में प्रभु को लखता है।।

संगम सरिताओं का शुचि अति।
देता पतितों को निर्मल गति।।
हम सब कहते तीरथ जिसको।
सम्मान मिले जग में उसको।।

परिवारों का संगम हितकर।
करवाये परिणय जोड़े घर।।
परिवार नया जन्मे जग में।
खुशियों के पुष्प खिलें मग में।।

भावों का संगम छंदों से।
मिलवाता है कवि बृंदों से।।
दर्पण समाज का लेखन है।
जग बनता जिससे चेतन है।।

संस्कृतियों का संगम अनुपम।
यश देता भारत को उत्तम।।
अक्षुण्ण रहेगा यश हरदम।
यदि हम पकड़ें मिलकर परचम।।
— मधु शुक्ला . सतना , मध्यप्रदेश .
 

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