क्षमा की कलम से - डा० क्षमा कौशिक

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हे राम तुम्हारा स्मरण मात्र, तन मन पवित्र कर देता है,
जीवन के सब संत्रासो से, तत्क्षण मुक्त कर देता है।
तेरे आदर्शों पर चलकर, जीवन  सफल हो जाता है,
तुझमें जो रम गया मोक्ष, का द्वार उसे मिल जाता है।

प्रभु तेरी इच्छा के आगे नत सारा संसार,
तू ही कर्ता, पालनकर्ता, सुख दुख तेरे हाथ,
अज्ञानी हम समझ रहे खुद को ही करतार,
हम तो केवल पुतले हैं, नचा रहा भगवान।
-  डा० क्षमा कौशिक, देहरादून , उत्तराखंड
 

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