सब कुछ बदल गया - झरना माथुर

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सोने की चिड़िया धर्म समुदाय में बदल गया,
जो शुद्ध जल था कभी अब बिस्लेरी में बदल गया। 

वो ठंडी हवा का झोंका एसी में बदल गया,
परिवार कुटुम्ब से बट कर फ्लैट में बदल गया। 

 मां की रोटी का रूप पिज़्ज़ा में बदल गया,
 एक ही थान का कपड़ा फटे कपड़ों में बदल गया। 

वो चरण स्पर्श अब हैलो - हाय मे बदल गया, 
स्वार्थ में इंसान क्या बदला सब बदल गया।
- झरना माथुर, देहरादून , उत्तराखंड
 

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