गणपति प्रभाती - कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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भाँति भाँति के गणपती, भिन्न भिन्न पंडाल।
कर कमलों में हैं कमल, शोभा बनी विशाल।
भक्ति भाव से पूजकर, मनते उत्सव आज।
लंबोदर आशीष दें, सकल बनाएँ काज।।

हे सुखदायक विघ्नविनाशक कष्ट सभी जन के हर लेना।
बुद्धिप्रदायक हे अधिनायक पीर सभी मन की हर लेना।
नाथ गजानन ज्ञान भरी शुभ बुद्धि सभी दिल में भर देना।
आज सभी करते विनती बस एक दया जग पे कर देना।
- कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश
 

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