गीत - झरना माथुर

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पास मेरे भी कभी तुम बैठ जाया करो,
हाल दिल का भी कभी हमको सुनाया करो। 

क्या छिपा है मुस्कुराहट से भरे चेहरे मे ये,
उन दिनो की याद हमको तुम दिलाया करो।

उन खतो के दौर के एहसास भी थे अज़ब,
बंद है जो अब लिफाफों मे पढ़ाया करो।

गुन गुनी उस धूप में है ओस की कुछ नमी,
शीत की खामोश हलचल में  समाया करो।
- झरना माथुर, देहरादून , उत्तराखंड 
 

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