गीत-राष्ट्र चिंन्ह - जसवीर सिंह हलधर 

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शेरों में गीदड़ की सूरत, खोज रहे क्यों भैया जी ।

राष्ट्र चिंन्ह सम्मान सभी का, करो न ताता थैया जी ।।

याद करो इतिहास पुराना, गुप्त वंश की बात करो ।

वैशाली के शिलालेख पर, मत इतना उत्पात करो ।

भारत माता का वाहन ये ,समझ न इसको गैया जी ।।

शेरों में गीदड़ की सूरत , खोज रहे क्यों भैया जी ।।1

रुको एक क्षण घोर विपक्षी, बात हमारी सुन लेना ।

चोटिल सिंह सदा गुर्राते, सत्य तथ्य ये गुन लेना ।

देता है इतिहास गवाही ,लूटे माल लुटैया जी ।।

शेरों में गीदड़ की सूरत ,खोज रहे ज्यों भैया जी ।।2

घबराना दुश्मन को जिससे ,तुम नाहक घबराये हो ।

जबड़ा सिर्फ़ ज़रा सा खोला ,संशय में क्यों आये हो ।

दृश्य अभी दिखना बाकी , जब करे सवारी मैया जी ।।

शेरों में गीदड़ की सूरत, खोज रहे क्यों भैया जी ।।3

उठती है आवाज आज भी, विंध्य ,हिमालय परिसर से।

अक्साई , पी ओ के , लेना , पाक ,चीन के लश्कर से ।

स्वेत कपोत उड़ाए तुमने , लूटा खूब रुपैया जी ।।

शेरों में गीदड़ की सूरत , खोज रहे क्यों भैया जी ।।4

- जसवीर सिंह हलधर , देहरादून

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