गीतिका सृजन - मधु शुक्ला 

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जिंदगी को #बेवफा कहते सभी संसार में,
लोग जीवन क्यों बड़ा ही चाहते आकार में।

बाल ध्रुव की जिंदगी से हैं सभी परिचित यहाँ,
आदमी की हो लगन बस कर्म के विस्तार में।

छोड़ कर सबसे शिकायत देखिए अपनी तरफ,
चाहिए बदलाव यदि संसार के आचार में।

भावना जब लोकहित की हो प्रबल खुद से अधिक,
बेवफाई झांक सकती ही नहीं व्यवहार में।

जन्म से कोई नहीं होता जगत में #बेवफा,
सच यही 'मधु' बह रहे हैं सब समय की धार में।
— मधु शुक्ला ., सतना , मध्यप्रदेश .
 

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