ग़ज़ल (हिंदी) - जसवीर सिंह हलधर 

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शाइरों  की  जिंदगी  को  धूप दान  मानिए ।
साल अस्सी के हुए लेकिन  जवान मानिए ।

बोलते कम हैं मगर वो देखते हैं दूर तक ,
खास हैं उस्ताद वो योगी महान मानिए ।

जब कभी आँखें निहारें छेड़िये मत बीच में ,
हुस्न पैमाइस उतारेगी  थकान मानिए ।

हाथ माइक आ गया तो रोक टोक हो नहीं ,
बीच में रोका अगर तीखे बयान मानिए ।

शब्द भारी अर्थ भारी ज्ञान वान हैं बहुत ,
शे'र तीखे कान तक खींची कमान मानिए ।

सीख लो उस्ताद से दो चार बात  काम की ,
खान से हीरा मिला खुद को सुजान मानिए ।

नारियल जैसे मगर रस खान के समान हैं ,
गीत ग़ज़लों की उन्हें ऊँची दुकान मानिए ।

पा गए आशीष "हलधर " नाम है समाज में ,
आप मेरी शायरी को धूम्र पान मानिए ।
- जसवीर सिंह हलधर , देहरादून
 

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