ग़ज़ल - अनिरुद्ध कुमार

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हँसी दिलकश रुहानी है मुहब्बत,
लुभाती दिल गुमानी है मुहब्बत।

जहाँ में प्यार से रखती तरावट,
कहे दुनिया सुहानी है मुहब्बत।

बहुत भोली फिदा होती हमेशा,
नहीं डरती सयानी है मुहब्बत।

कसम खाये निभाने की सभी से,
रहे कायम जुबानी है मुहब्बत।

लगे यह जिंदगी हरदम गुलाबी,
मजा आये दिवानी है मुहब्बत।

सभी दिल थाम लेते पा इशारा,
लबों से खुद बयानी है मुहब्बत।

यहाँ पर कौन बोलो पूछता 'अनि',
यही समझो निशानी है मुहब्बत।
- अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड
 

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