ग़ज़ल - अनिरुद्ध कुमार

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सदा दिल चुराया जरा मुस्कुराकर,
तड़पता कलेजा फसाना सुनाकर।

बयां  क्या  करें  दास्तानें-मुहब्ब्त,
जलाया रुलाया भरोसा दिलाकर।

नजर से इशारा निगाहें मिलाकर, 
सरे-राह  लूटा  निशाना  बनाकर।

दिखाया हमेशा हँसी रोज सपने,
जलाया कलेजा बहाना सुनाकर।

हमें क्या पता प्यार की बेवफाई,
बहुत दर्द झेला कलेजा जलाकर।

उमर  का  तजुर्बा रहो दूर इनसे,
सभी छोड़ देते सदा आजमा कर।

सबों से यही'अनि' करे है गुजारिश,
लुटाना नहीं जाँ खिलौना बनाकर।
- अनिरुद्ध कुमार सिंह, धनबाद, झारखंड
 

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