गजल - ऋतु गुलाटी

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अजी सुनो देखो निशा छा रही अब रात है।
दिखें नही अब आसमां मे कही प्रभात है।

उषा की किरणे आज हमको लगे प्यारी बड़ी।
कली खिली फूलों की मिलती हमें सौगात है।

चमक रही है सूरज की अब रोशनी चारो तरफ।
लगे हमे उपवन मे अब खिल रहा हर पात है।

खिली हुई हमको लगे जिंदगी भी आज तो।
लगे हमे मीठी खिली धूप दे बरसात है।

बहक न जाना आज तू जा रही अब रात भी।
कदम रूका है कुछ समय बस समय की बात है।
- ऋतु गुलाटी ऋतंभरा, चंडीगढ़
 

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