गज़ल - झरना माथुर

pic

दूर रहकर भी जिनका सुरुर है,
उनकी शोखियो का कसूर है।

मैं तो दीवानी बन गयी हूँ,
उनकी चाहतो का कुछ गुरुर है।

ये सादगी मेरी बंदगी है,
अब वो ही बस मेरे हुजूर है।

उन आखों में मस्ती शराब सी,
पैमानों का जिसमें फितूर है।

मौला दूर कर उनकी बलाये,
मुझमें कत्ल करने का शऊर है।

अब रोजो में उनकी दुआ है,
उनके दिल में " झरना " जरुर है।
- झरना माथुर, देहरादून, उत्तराखंड 
 

Share this story