ग़ज़ल - झरना माथुर 

pic

आपको देखे जमाना हो गया,
राज दिल का पुराना हो गया। 

हा कसक है ये दबी अब भी कहीं,
अब नया तेरा ठिकाना हो गया।
 
शब  जहाँ  की नूर जो वो हो गई, 
दीप-बाती  का फसाना हो गया।

अब कहा गूंजती सहर वो शाम है,
बचपना जो अब सयाना हो गया।
- झरना माथुर, देहरादून , उत्तराखंड
 

Share this story