हिंदी ग़ज़ल - जसवीर सिंह हलधर

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मदहोश जो पड़े हैं उनको ज़रा हिला दे।

हर दर्दमंद दिल को ऐसी दवा पिला दे ।

बीमार लोग हैं कुछ हैवानियत के मारे ,

उनको इनाम में बस तू मौत का सिला दे।

सुर्खी लिए गुलाबी फूलों की डालियां हो ,

बूढ़े चमन में मौला ताजी हवा मिला दे ।

सहमी हुई हैं कलियां बेहोश बागवां है,

उम्मीद के दीये से इनको ज़रा जिला दे ।

आगोश में जमीं के हो चैन हर बशर को ,

अधिकार नागरिक को समता भरे दिला दे ।

सबका विकास होवे कल्याण हो सभी का ,

हर हाथ नौकरी हो वो नेक सिलसिला दे ।

आज़ाद मुल्क के हम आज़ाद हैं परिंदे ,

दुनिया जिसे सराहे परवाज़ काफिला दे ।

सबको सुकून दे दे आराम दे सभी को ,

विश्वास दे सभी को शिकवा न दे गिला दे ।

"हलधर" कही ग़ज़ल में ये भीख मांगता है ,

ये फूल सा तिरंगा दुनिया में अब खिला दे ।

- जसवीर सिंह हलधर , देहरादून

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