ईशत हास् हमारी हिंदी - राजू उपाध्याय  

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भावों की
मनभावित आस है
हमारी हिंदी...!
शब्दों का
रूपायित भाष है
हमारी हिंदी..!
जग-
जननी है ,
यह शब्द स्वरों की ,
मां वाणी
का ईशत हास् है,
हमारी हिंदी..!
जन-
गण-मन की
ये अभिव्यक्ता है,
जीवन
गति का उच्छ्वास है,
हमारी हिंदी...!
- राजू उपाध्याय, एटा , उत्तर प्रदेश

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