जय बजरंगबली  - भूपेन्द्र राघव

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अंजनी-पवन पूत, बल बुद्धि में अकूत, 
प्रभु राम जी के दूत, मेरे हनुमान जी ।

बिगड़े बनाते काम, जपो एक राम नाम,
यही नाम चार धाम, करो हिय ध्यान जी।

चहुँ ओर बाजे डंका, त्रेता युग फूँकी लंका,
कलयुग नहीं शंका, जले पापिस्तान जी ।

रुद्र अंश अवतार, विनती है बार-बार, 
कर देना भव पार, जीवन का यान जी ।
- भूपेन्द्र राघव, खुर्जा , उत्तर प्रदेश
 

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