जय गंगाधर - कालिका प्रसाद

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इस जगत के रक्षक हो,
भक्तों के कष्ट हरते हो,
साकार निराकार ओंकार रुप,
जय गंगाधर हर-हर महादेव।

जिसका आदि न अन्त है,
कपूर के समान गौर वर्ण है,
सृष्टि के कण-कण में व्याप्त है,
जय गंगाधर हर -हर महादेव।

प्रभु श्रीराम के ईष्ट हो भोलेनाथ,
दया के सागर हो बाबा केदारनाथ,
द्वादश ज्योतिलिंगों में रहते है,
जय गंगाधर हर-हर महादेव।

देव दानव मानव नित पूजन करते,
शीघ्र  प्रसन्न  हो  जाते आशुतोष,
जगत के लिये विषपान किया है,
जय गंगाधर हर-हर महादेव।
- कालिका प्रसाद सेमवाल
मानस सदन अपर बाजार
रुद्रप्रयाग उत्तराखंड
 

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