साहित्य आजकल द्वारा ऑनलाइन आयोजित हुआ "काव्यलोक" कार्यक्रम

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utkarshexpress.comसिरोही(पिण्डवाड़ा) - साहित्यिक मंच साहित्य आजकल के द्वारा वर्चुअल रूप से ऑनलाइन कवि सम्मेलन "काव्यलोक" कार्यक्रम यूट्यूब पर लाइव आयोजित किया गया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता राजस्थान के वरिष्ठ साहित्यकार गुरुदीन वर्मा द्वारा की गई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मध्यप्रदेश के रवि शंकर विलगैया शामिल हुए। कार्यक्रम की शुरुआत उत्तराखंड की कवयित्री अंशी कमल द्वारा सरस्वती वंदना की प्रस्तुति से हुई। अध्यक्षता कर रहे गुरुदीन वर्मा ने कहा कि साहित्य आजकल द्वारा निःस्वार्थ भाव से जिस प्रकार साहित्यिक सेवा कार्य निरन्तर किये जा रहे है वह काबिले-तारीफ है। इसके लिए संस्थापक हरे कृष्ण प्रकाश बधाई के पात्र हैं। उन्होने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम से अवश्य जन-जन लाभान्वित होंगे।
उक्त कार्यक्रम की जानकारी देते हुए साहित्य आजकल के संस्थापक युवा कवि हरे कृष्ण प्रकाश ने कहा कि देश भर के रचनाकारों की कविताओं से जन जन को रूबरू कराने के लिए और साहित्य के प्रति लोगों का लगाव बढ़ाने के लिए हमारी टीम निरन्तर कार्यक्रम आयोजित करती रही है। इसी के निमित्त काव्यलोक कार्यक्रम प्रारम्भ हुआ जो प्रत्येक रविवार को आयोजित होता है। मीडिया प्रभारी गुरुदीन वर्मा के अनुसार इस रविवार के कार्यक्रम में देश के अलग अलग क्षेत्रों से कई रचनाकार शामिल हुए। इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से दिल्ली की रंजना मजूमदार, उत्तर प्रदेश के रामबृक्ष बहादुरपुरी, श्वेता दूहन देशवाल, उत्तराखंड की अंशी कमल, राजस्थान के गुरुदीन वर्मा, मध्यप्रदेश के रवि शंकर विलगैया ने अपनी एक से बढ़कर एक स्वरचित कविताओं के माध्यम से शानदार लाइव प्रस्तुति देकर कार्यक्रम को यादगार बना दिया। 
कार्यक्रम में हरे कृष्ण प्रकाश ने कहा कि भारतीय सभ्यता संस्कृति के विकास में साहित्य का योगदान महत्वपूर्ण है। सभी साहित्यकारों से अपील करते हुए कहा कि युवाओं की अभिरुचि साहित्य में बढ़े, इसके लिए भी सभी साहित्यकार कदम उठाए क्योंकि साहित्य में ही समाज निर्माण की शक्ति है। वहीं साहित्य आजकल के उपाध्यक्ष व समीक्षक विमल कुमार ने सभी साहित्यकारों की प्रस्तुति पर अपनी उत्कृष्ट प्रतिक्रिया देकर उत्साहवर्धन किया। संयोजक हरे राम प्रकाश ने सफल कार्यक्रम हेतु सभी साहित्यकारों का आभार व्यक्त किया 
इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से विमल कुमार, हरे राम प्रकाश, विशाल लोधी, प्रीतम प्रकाश, रंजना मजूमदार, गुरुदीन वर्मा, हीरालाल, कामरान अलवी, शिवम प्रकाश, रामबृक्ष बहादुरपुरी, श्वेता दूहन देशवाल, अंशी कमल, आदित्य कुमार, रवि शंकर विलगैया आदि साहित्यकार उपस्थित रहे।

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