हे मां सिद्ध दात्री - कालिका प्रसाद

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आदिशक्ति मां जगदम्बा भवानी,
भक्तों   की  तुम   रक्षा  करती,
मैं तेरा नित गुणगान करूं मां,
अष्ट   भुजा  हे  दुर्गा  भवानी।

मां    तुम्हारे    नौ     रुप   है,
नवरात्रि में सभी नौ रुप पूजे जाते,
मां   तुमसे   मेरी  यही पुकार,
कृपा दृष्टि  रखना मां जगदम्बे।

हे मां दुर्गा तुम जगत जननी हो,
नवरात्रि में घर-घर पूजी जाती हो,
दुष्ट दानवों का तुमने संहार किया,
अत्याचारियों का तुमने नाश किया।

रुप   अलौकिक  मां  तुम्हारा,
भक्तो  को जो  अति भाता है,
सिंह  वाहिनी  तुम  हो   माते,
सब पर तुम स्नेह बरसाती हो।

मेरे मन में  ज्ञान ज्योति  जला दे,
मां मन से   तम   को  मिटा दे,
मां तुम  हो  पालनकर्ता दुखहर्ता,
 तुम सुख सम्पत्ति  की दात्री   हो।

हे  जगत  जननी  मां कल्याणी,
भक्तो   के   तुम   रक्षक   हो,
श्रद्धा भक्ति से हम पूजा करते है मां,
तेरे चरणों में हम शीश नवाते है।

करुणामयी वात्सल्य रुपी हो,
भक्तों की तुम पुकार सुनती हो,
मां   जगत   जननी  जगदम्बे,
तेरे चरणों में मां कोटि-कोटि प्रणाम।
- कालिका प्रसाद सेमवाल
मानस सदन अपर बाजार
रुद्रप्रयाग   उत्तराखंड
 

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