प्रभाती मुक्तक - कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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युक्तिपूर्ण कर्म - 
कभी बुरे न कर्म आप भूल से किया करें।
सदा पुनीत काम आंख मूँद के सदा करें।
विवेकपूर्ण कृत्य से सदैव ही जुड़ा करें।
बिना प्रयोग ज्ञान अन्य को नहीं दिया करें।।1
स्नेह वर्षा -
बड़ा अभिभूत था मैं कल बधाई सैकडों पा कर के।
सफर नूतन हुआ आरंभ नवल उत्साह ला कर के।
बिताए साल जो अब तक बहुत सारे हुए अनुभव,
मधुर यादें करीने से रखूँ दिल में सजा कर के।
- कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश

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