प्रवीण प्रभाती - कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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सावन की शिवरात्रि बड़ी मन भावन और सदा शुभकारी।
पूजन भक्त करें दिन में भजनामृत धार बहे निशि सारी।

शैलसुता-शिव देख रहे नित दृश्य मनोहर और सुखारी।
मंगल हेतु प्रणाम करें कर अर्पण मन से भक्ति हमारी।

सुंदर रूप बसा उर में निज अंतस खोल उन्हें दिखलाते
जीवन के सब कष्ट सभी जन शर्म बिना उनको बतलाते।

हे शिव तारणहार तुम्हीं यह तथ्य सभी प्रभु को समझाते।
बैठ समीप सदाशिव के हर बात सभी उनसे मनवाते।

सावन की हर रात्रि मनोहर और सभी दिन हैं शुभकारी।
जो मन में शिव भक्ति रखे वह मानव ही बनता हितकारी।

शंभु विनाश करें हर दुर्गुण जीवन हो तब शांत सुखारी।
हाथ धरें हर मस्तक पे करना नित मंगल हे त्रिपुरारी।

जो मन में शिव भक्ति रखे उसको दुख दारिद भी न सताता।
ओम शिवाय रटे दिन-रात उसे भय संकट भी न डराता।

दूध दही मकरंद व शर्कर ले घृत से अभिषेक कराता।
चंदन बेल धतूर व भंग चढ़ा शिव को हर भक्त मनाता।
- कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश
 

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