प्रवीण प्रभाती - कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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कृष्ण बड़े मनमोहक हैं बँसुरी मनभावन नित्य बजाते।
प्रेम करें हर भक्तन से शुभ जीवन की वह राह दिखाते।
योग प्रयोग करे जन मानस जीवन पद्धति वो सिखलाते।
कर्म  करें फल को न तकें यह गूढ़ रहस्य सदा बतलाते।
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कृष्ण बसे जब से मन में तब से दिल को कुछ और न भाता।
गोपन गोपिन भाँति बसी छवि चित्त वहीं नित दौड़ लगाता।
नैन निहार रहे दिन रात अदृश्य हुआ घनश्याम सताता।
दर्शन जो मुरलीधर दें सुख चैन तभी मन को मिल पाता।
- कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश 

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