सुभाष चंद्र बोस तुम्हें प्रणाम है - क्षमा कौशिक 

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खून रगों में कर्ज देश का,आज तुम्हें
लौटाना होगा,
स्वतंत्रता की खातिर वीरों रक्त तुम्हें
बहाना होगा।
दो मुझे तुम खून, प्रण मेरा, तुमको
आजादी दूंगा,
आजाद फौज को बना शत्रु को धूल
चटाकर ही दम लूंगा।
देश की खातिर खून बहे उसमें समझो
रवानी है,
वरना सच है, वह खून नहीं,खून नहीं
वह पानी है।
नेता जी के उद्बोधन ने अजब शक्ति
संधान किया,
आजादी पर मर मिटने के जज्बे का
आधान किया।
नेता सुभाष के नारे में जीवन का मर्म
झलकता है,
जिए मरेंगे लिए देश हित भाव हृदय में
जगता है।
सुभाष चंद्र बोस हिंद की आन बान 
और शान है,
भारत के उद्भट लाल को कोटि कोटि प्रणाम है।
- डा० क्षमा कौशिक, देहरादून , उत्तराखंड

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