देह क्या करेंगे? - अनुराधा पाण्डेय 

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नेह से चिर रिक्त जीवन ,
साँस भी हो भार जैसे ।
माँस मज्जा रक्त वाही...
देह लेकर क्या करेंगे ?
प्यास से आकुल धरा हो ।
ताप बादल में भरा हो ।
चेतना हो नित्य मरती ,
वेदना आकाश चढती ।
विष बुझे फिर नीर वाहक....
मेह लेकर क्या करेंगे ।
देह लेकर --
छाँव ही डसने लगे जब ,
व्यर्थ सिर पर छत रहे क्यों ?
हो प्रणय की बंद खिड़की,
आत्मा ही हत रहे क्यों?
नित्य उर में घाव करता...
गेह लेकर क्या करेंगे ।
देह लेकर -
हो सदा अवगुंठनो में ,
चिर कलुषतम भाव सारे ।
प्रेम मे भी नित्य जारी,
लग रहे हों दाव सारे ।
छद्म मन के प्राण दाहक,
नेह लेकर क्या करेंगे ।
देह लेकर क्या करेंगे ।
नेह से चिर रिक्त जीवन ,
साँस भी हो भार जैसे ।
माँस मज्जा रक्त वाही....
देह लेकर क्या करेंगे ।
- अनुराधा पाण्डेय, द्वारिका दिल्ली

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