विश्व हिंदी दिवस - क्षमा कौशिक

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कसम खाते हैं हिंदी को विश्व भाषा बनाएंगे
शान है हिंदी भारत की इसे वैश्विक बनायेगे
शब्द की खान है भावों का ये गहरा समंदर है
समंदर में छिपे मुक्ता से हर स्वर को सजाएंगे
कसम खाते हैं हिंदी को विश्व भाषा बनाएंगे।

सरलता से सधी इसमें तरलता वास करती है
ह्रदय में ये मधुरता का नया उल्लास भरती है
यही उल्लास हर मन में सहजता से जगाएंगे
हिंदी के सहज सौष्ठव से सम्मित गीत गायेंगे
कसम खाते हैं हिंदी को विश्व भाषा बनाएंगे

तीसरा पद अभी इसका नहीं संतोष है इसमें
अपने योग्य यह सम्मान पाया है नहीं इसने
है निज मान की भाषा सकल सम्मान पाएगी
विशिष्ठ पहचान इसकी विश्व में कर दिखाएंगे
कसम खाते हैं हिंदी को विश्व भाषा बनाएंगे
- डा० क्षमा कौशिक, जी०एम०एस० रोड, देहरादून 
 

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