योगिक दोहे - कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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तन से मन का शुभ मिलन, करवाता है योग।
संयम से कैसे रहें, बतलाता है योग।।1

जीवन पद्धति दे बदल, करके नये प्रयोग।
जीवन स्वस्थ प्रसन्न हो, अगर करें नित योग।।2
 
देह सुदृढ हो योग से, मन पाये आराम।
कुछ पल करिये योग नित, फिर करिये विश्राम।।3

दिन का जब आरंभ हो, करके प्राणायाम।
स्वस्थ्य सबल तन मन रहे, मिले सफल परिणाम।।4

संयम अरु परहेज से, स्वतः भगाएं रोग।
प्रतिदिन प्रातःकाल उठ, मन से करिये योग।।5

उपयोगी आसन करें, जो खुद के अनुकूल।
प्रतिरोधक क्षमता बढ़े, यही योग का मूल।।6

ज्ञान ध्यान जप जोग अरु, मर्यादित आचार।
सुखमय जीवन के सभी, अनुपम हैं आधार।।7

राग-द्वेष ईर्ष्या-जलन, लगते जैसे शूल।
अपने जीवन से इन्हें, कर दें नष्ट समूल।।8

जीवन पद्धति योग है, मात्र नहीं व्यायाम।
स्वस्थ करे तन-मन सदा, करिये प्रातः याम।।9

नियमित करके योग को, काया रखें निरोग।
दिनचर्या को लें बदल, करके योग प्रयोग।।10
- कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश
 

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