बच्चे - मधु शुक्ला 

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बच्चे होते मन के सच्चे, लगते सबको प्यारे।
पुष्प तितलियाँ इनके साथी, सूरज चंदा तारे।

इन्हें सभी लगते हैं अपने, सबसे रखते नाता।
जाति धर्म से अनजाने ये, इनको हँसना भाता।
घर आँगन बच्चों से महके,  रोशन  रहते  द्वारे....... ।

स्वार्थ रहित होते हैं बच्चे, सत्य हमेशा कहते।
धन को बाल नहीं पहचानें, मेल जोल से रहते।
चंचल मधुरिम इनके करतब,पर सब जन दिल हारे..... ।

प्रेम एकता का पथ हमको, बच्चे ही दिखलाते।
बचपन से सुंदर हम जग में, वक्त न कोई पाते।
बच्चों से मिलकर मुस्काते, रिश्ते नाते सारे...... ।
— मधु शुक्ला .सतना , मध्यप्रदेश .
 

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