श्रमिक दिवस - मीरा पाण्डेय

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मेरी कुछ फरमाइश हैं .
जलती धूप पारा कितना हाई हैं .
बस छोटी सी मेरी ख्वाहिश हैं .
जरूरत ac की कमरो मे नही .
किचन मे आई हैं .
40 डिग्री पारा .
सुबह से खटपट किचन ने .
कभी नाश्ता कभी टिफिन .
बच्चो की फरमाइश हजार हैं .
सुन रहे थोड़ी अस्त व्यस्त हूँ .

और bp भी हाई हैं .
एक काम खत्म नही होता .
दूसरा सर मे आया .
पेट मेरा भूखा हैं .
तन पसीना से नहाया हैं .
मेरी रफ्तार बहुत हैं .
पर मैं भी इंसान हूँ .
श्रम हम मिल कें करते हैं, अगर आप बाहर तो हम घर मे अपनी ऊर्जा देते हैं आप कें जूते से ले कर टिफिन तक तय करते हैं .सब्जी में  तेल कम हो कोशिश करते हैं .आप की और परिवार की सेहत बनी रहे इस लिए गृहणी से dr तक बनते हैं .
आप तो ऑफिस की चेम्बर मे ac की हवा मे दिमागी काम करते हैं .पर हम धूप धुंआ पसीना सब झेल कें .24 घंटे घर को देते हैं .
सुकून की नींद तो मैं वाहर की खुली हवा मे भी ले सकती हूँ पर किचन की आग बहुत चुभती हैं .
कपड़े प्रेस करते वक्त हाथ जलती हैं .
ac की जरूरत कमरो ने नही उस वक़्त किचन  मे महसूस होती हैं .
......इतना तो हक बनता हैं .मेरा किचन मुझसे कहता हैं गर्मी उसको भी लगता हैं 
- मीरा पाण्डेय, दिल्ली
 

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