मजदूर दिवस (01 मई) - हरी राम यादव

 
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utkarshexpress.com - संसार में  विभिन्न तरह के जीव निवास करते हैं। इनको  जलचर, थलचर और नभचर तीन प्रमुख श्रेणियो में बांटा गया   हैं। यह सभी जीव अपने जीवन को आगे बढ़ने के लिए प्रतिदिन कुछ न कुछ श्रम करते हैं जिससे इनको भोजन की प्राप्ति होती है। इनमें से जलचर और नभचर तो प्रकृति द्वारा प्रदत्त साधनों से पूर्णतः अपना काम चला लेते हैं। थलचर में भी काफी जीव जंतु अपना जीवन यापन प्राकृतिक वस्तुओं से कर लेते है और इसके लिए इनको काफी कम मेहनत करनी पड़ती है ।  पृथ्वी  पर निवास करने वाला मनुष्य सबसे ज्यादा बुध्हिमान होने के कारण अपने भोजन को जुटाने में खाद्य - अखाद्य और अच्छे - बुरे का काफी सोच विचार करता है जिसके कारण उसको अपने और अपने आश्रितों का भोजन जुटाने में काफी मशक्कत करनी पड़ती है।
मनुष्य अपने और अपने परिवर का भोजन जुटाने के लिए विभिन्न तरीके प्रयोग में लाता है। इसमें  खेती करना, अपना व्यवसाय करना , नौकरी करना और मजदूरी करना आदि मुख्य हैं। वैसे तो यह सभी काम श्रम पर ही आधारित हैं, और इनको करने वाले सभी लोग श्रमिक या मजदूर कहलाना चाहिए  लेकिन हमारे समाज में जो लोग असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं उनको ही मजदूर कहा जाता है। अगर व्यापक रूप से सोचा जाए तो वह सभी लोग मजदूर हैं जो अपना जीवन यापन करने के लिए किसी दूसरे व्यक्ति के अंतर्गत काम करते हैं। बस अंतर इतना है कि जो लोग पढ़े लिखे हैं वह ऑफिस में बैठकर छाया में मानसिक श्रम  करते है और जो कम पढ़े लिखे या निरक्षर हैं वह तेज धूप में दैनिक मजदूर के रूप में शारीरिक श्रम  करते हैं। 
पूरे विश्व में 01 मई को एक महत्वपूर्ण घटना की याद में अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस मनाया जाता है। सन 1886 में संयुक्त राज्य में वहाँ के श्रमिकों ने आठ घंटे के कार्य दिवस की मांग के लिए एक राष्ट्रीय हड़ताल का आयोजन किया था । शिकागो के हेमार्केट स्क्वायर में विरोध प्रदर्शन चल रहा था । उस दौरान वहाँ पर मजदूरों से  एक दिन में 15-15 घंटे काम लिया जाता था । आंदोलनकारी मजदूरों पर पुलिस ने गोली चला दी जिससे  कई मजदूरों की जान चली गईऔर  सैकड़ों श्रमिक घायल हो गए। उनके बलिदान कि याद में तब से 01 मई को  अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस मनाया जाने लगा। मजदूर दिवस को लेबर डे, श्रमिक दिवस या मई डे के नाम से भी जाना जाता है। श्रमिकों के सम्मान के साथ ही मजदूरों के अधिकारों के लिए आवाज उठाने के उद्देश्य से भी इस दिन को मनाया जाता है ताकि मजदूरों की स्थिति समाज में मजबूत हो सके। 
 इस घटना के तीन साल बाद 1889 में अंतर्राष्ट्रीय समाजवादी सम्मेलन की बैठक हुई जिसमें यह तय किया गया कि हर मजदूर से प्रतिदिन 8 घंटे ही काम लिया इस दिन मजदूरों को छुट्टी देने का भी फैसला लिया गया। बाद में अमेरिका के मजदूरों की तरह विश्व के कई अन्य देशों में भी 8 घंटे काम करने के नियम को लागू कर दिया गया। हमारे देश में पहली बार मई दिवस 01 मई 1923 में तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में लेबर किसान पार्टी ऑफ़ हिंदुस्तान के नेता कामरेड सिंगराबेलु चेत्तायार कि अध्यक्षता में  मनाया गया। तब से हमारे देश में 01 मई  को मजदूर दिवस मनाया जाता है । 
श्रमिक किसी भी देश के विकास की रीढ़ होते हैं ।  इनके श्रम के बिना न तो कोई उद्योग धंधा चल सकता है और न ही कोई देश विकास की ओर अग्रसर हो सकता है ।  संगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिक तो अपने अपने संगठनों के माध्यम से दबाव डालकर अपने अधिकारों को काफी हद तक पा लेते हैं   लेकिन असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले श्रमिकों का शोषण आम बात है । असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले  दिहाड़ी मजदूर का काम अनिश्चित होता है । उसे यह नहीं पता होता कि आज काम मिलेगा या नहीं । वह काम की तलाश  में एकदम सुबह घर से खाने का डिब्बा लेकर निकलता है और सड़कों के चौराहों पर खड़ा होकर काम मिलने का इंतजार करता है । यदि काम मिल गया तो ठीक, नहीं तो गाड़ी का किराया  देकर पुनः घर की ओर निराशा लिए  चल पड़ता है। 
 हमारे देश के राजनीतिक दल चुनाव के समय अपने अपने मेनिफेस्टो में बड़े बड़े वादे करते हैं लेकिन आज़ादी के बाद से मजदूर के जीवन में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है। वही अनिश्चितता आज भी है जो 75 वर्ष पहले थी । न तो काम  मिलने की गारंटी है और न ही बीमार पड़ने या कोई दैवी आपदा आने पर खाने पीने कि व्यवस्था का इंतजाम । इसका सबसे बड़ा उदाहरण कोरोना काल में देश के विभिन्न भागों से मजदूर वर्ग का पलायन था ।  लोग दो ढाई हज़ार किलोमीटर की पैदल यात्रा करके अपने घरों को आने के लिए मजबूर थे ।  यदि मजदूरों की संख्या की बात कि जाय तो बढती जनसंख्या और बेरोजगारी के साथ यह तेजी से बढ़ी है । आज आवश्यकता इस बात है कि मजदूरों के हितों की रक्षा के लिए रोजगारोन्मुखी योजनायें बनायी जाए । हर राज्य अपने प्रदेश की जनसंख्या के अनुसार रोजगार का सृजन करे ताकि किसी प्रदेश के निवासी को दूसरे प्रदेश में रोजगार के लिए न जाना पड़े ।
- हरी राम यादव, अयोध्या, उत्तर प्रदेश

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