काव्य साधन - कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

 
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चिंतन करके जब भी लिखते, उसका पड़ता गहन प्रभाव।
सतत अध्ययन और मनन से, उत्तम होता शब्द चुनाव।
अगर बाँध लें कथ्य शिल्प में, लय बन जाती अपने आप,
पढ़ कर सुन कर अच्छा लगता, मधुमय होता काव्य बहाव।
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जीवन के जितने हैं पहलू, जिनसे मानव हो दो-चार।
कभी करुण वीभत्स कभी या, कभी दिखे अनुपम शृंगार।
हास्य-व्यंग्य या गान प्रकृति के, दिखें काव्य में भाव अनूप,
अलख जगाती कहीं कहीं,  कहीं तंत्र पर करे प्रहार।
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विविध विधाएं काव्य सृजन की, इनमें भावों को लें ढाल।
गीत सवैये गजल गीतिका, जिनमें बसती है सुर-ताल।
दोहे-चौपाई छंदों में, रचे गए हैं कितने ग्रंथ, 
रोला, महिया घनाक्षरी सब, उर में बसते सालों-साल।
- कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश

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