पृथ्वी - कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

 
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पूर्ण धरा बदहाल हुई खतरा इस पे दिखता अति भारी,
हालत नित्य खराब करें मिल के सगरे जग के नर-नारी।
स्वार्थ भरा सबके मन में लगती धरती अति  दीन-दुखारी,
ठोस उपाय करें जिससे महिती खुशहाल बने फिर सारी।1

जंगल पर्वत हैं गहने वसुधा इनसे धनवान बनेगी,
रक्षण हो इनका तब ही जलवायु धरा पर ठीक रहेगी।
काट दिये जब जंगल ही तब बारिश में अति देर लगेगी,
वृष्टि भयानक बाढ़ बने हर एक दिशा क्षति खूब करेगी।2

टूट रहे हर एक दिशा अब पर्वत भी नुकसान करेंगे,
वृक्ष जड़ें जकड़ें कस के जब भूमि तभी स्थिर मेरु रहेंगे।
संपति नष्ट न हो तब ही जन के मन में अहलाद भरेंगे,
दृश्य दिखा अपने मनमोहक वे जन के संताप हरेंगे।3
- कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश
 

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