रामायण मे जीवन जीने की क्या बाते बतायी गयी - झरना माथुर

pic

utkarshexpress.com जैसा की हम सभी जानते है कि इगास के साथ ही दीपावली पर्व का समापन हो जाता है। ये पर्व हमे जीवन में कुछ न कुछ शिक्षा जरुर देते हैं। सनातन धर्म में कई धर्मग्रंथ, वेद, उपनिषद ने हमें जीवन का महत्व बताते हुए जीवन जीने की कला भी सिखाते हैं। इन्ही में से एक है महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित रामायण के दोहे। इन दोहों से जीवन में ना सिर्फ आपको धर्म के रास्ते पर चलने की सीख देते हैं बल्कि जीवन के हर मोड़ पर आपको लाभ भी देते हैं। इस महाकाव्य में दशरथ नंदन श्रीराम और माता जानकी ही नहीं बल्कि सामाजिक जीवन को जीने के लिए संपूर्ण ज्ञान है। रामायण में पांच बातों के बारे में बताया गया है जो हमको जीवन जीने के तरीके के बारे में बताते हैं। इससे जीवन का स्तर बढ़ेगा और आपकी कई परेशानियां भी दूर होंगी। आइए जानते हैं कि रामायण में जीवन में तरक्की के लिए कौन सी पांच बातों के बारे में बताया गया है। 
1-समान व्यवहार ही बनाता है सबसे बेहतर - रामायण की सबसे बड़ी सीख है सबके साथ समान व्यवहार करना। भगवान राम ने अपने पूरे जीवन काल में सभी के साथ समान व्यवहार किया। उन्होंने कभी भी लोगों को जाति, धर्म, लिंग आदि के भेदभावों से नहीं देखा, उन्होंने सभी के साथ एक ही व्यवहार रखा। उन्होंने प्रकृति और मनुष्य के बीच एक नया संबंध बनाया, जो बताता है कि सच्चा मनुष्य वही है जो सभी के साथ समान व्यवहार करे।
2-अनुशासन और मर्यादा हैं जीवन की शक्ति -- भगवान राम ने अपने पूरे जीवन काल में कभी भी मर्यादा का उल्लंघन नहीं किया, इसलिए वह मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम बने। साथ ही वह हमेशा अनुशासन में रहे। अनुशासन सुखी जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। मर्यादाएं जीवन में आने वाले संघर्षो से जूझने की शक्ति देती हैं और भटके राही के लिए दिशासूचक यंत्र बनती हैं। सुखमय जीवन के लिए मर्यादा और अनुशासन बहुत जरूरी है।
3-तरक्की के लिए यह है अहम चीज - अच्छी संगति मनुष्य की तरक्की के लिए बहुत जरूरी है, अगर वह गलत संगति में है तो जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता रुक जाता है। कैकयी, दासी मंथरा की गलत बातों और बुरे विचारों में आकर महाराज दशरथ से राम के लिए 14 वर्षों का वनवास मांग लेती है। इसलिए हमें यह सीख मिलती है कि हमें बुरी संगति से बचना चाहिए।
4-समर्पण हमेशा देती है संतुष्टि - किसी भी काम को पूरा करने के लिए मनुष्य को हमेशा समर्पित रहना चाहिए। इससे वह अपना आगे का रास्ता खोज सके और जीवन में जो बनना चाहे, वह बन सके। जीवन में तरक्की पाने के लिए आपको बहुत मेहनत करनी पड़ेगी और उस कार्य में पूरी तरह समर्पित होना पड़ेगा। भगवान राम के लिए हनुमान जी का प्रेम और निस्वार्थ सेवा हमें सिखाती है कि आराध्य के चरणों में बिना किसी संदेह के समर्पित कर देना चाहिये।
5-दुख की घड़ी से निकल आते हैं बाहर -  रामायण एक महाकाव्य है, जो विविधताओं से भरा हुआ है। दशरथ के तीन पत्नियां थीं और चार पुत्र थे, सभी अलग-अलग चरित्र के लेकिन फिर भी सभी एक-साथ रहते थे। भगवान राम ने लंका पर चढ़ाई करते हुए अपने सेना में सभी को शामिल किया, वो चाहें फिर बंदर हों या फिर अन्य जानवर। इससे उनको लंका पर विजय प्राप्त करने में मदद मिली। इससे सीख यह मिलती है कि अगर पूरा परिवार हर स्थिति में एक-जुट है तो आप दुख की घड़ी से जल्दी बाहर निकल आएंगे।
6-बदला लेने से अच्छा माफ करना सीखें - भगवान राम में हमेशा प्यार और दया का भाव रहा है। वह बदला लेने से अच्छा माफा करने पर विश्वास करते थे। रावण का अंत, माता सीता का हरण बना था। इससे पता चलता है कि दूसरों को नुकसान पहुंचाने के चक्कर में हम खुद ही जल जाते हैं। इसलिए माफ करने से एक महान इंसान बनते हैं। अगर दैनिक जीवन में कोई भी भगवान राम के इन गुणों का दस फीसदी भी अपने जीवन में उतार ले तो उसे कभी भी निराशा हाथ नहीं लगेगी। वो संतुष्ट और खुशहाल जीवन जी सकता है।
- झरना माथुर, देहरादून , उत्तराखंड 

Share this story