देहरादून-पौड़ी-खिर्सू मार्ग बस सेवा स्थानीय नागरिको की अरुचि के कारण लटकी अधर में

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utkarshexpress.com देहरादून (विनोद निराश) - उत्तराखंड परिवहन निगम सदैव तत्पर रहा है पर्वतीय अंचल के दूर-दराज़ में बसे लोगों को अच्छी परिवहन सुविधा देने के लिए, मगर उत्तराखंड प्रदेश में यात्रियों को रोडवेज की बस सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कारण स्पष्ट है कि उत्तराखंड रोडवेज की बसे विभिन्न मार्गों पर जनप्रतिनिधियों की सिफारिश पर शुरू तो कर दी जाती है मगर स्थानीय नागरिको का कोई सहयोग नहीं मिलता। इसलिए ये सेवाएं कुछ दिनों के बाद स्वतः ही बंद हो जाती है। हाल ही में देहरादून से पौड़ी-खिर्सू मार्ग के लिए बस संचालित की गई तो पहले दिन ड्राईवर-कंडक्टर का स्वागत फूल मालाओं से किया गया, क्यूंकि इस क्षेत्र में पहली बार सरकारी बस का शुभारम्भ हुआ था, मगर मात्र दस दिन में ये बस सेवा दम तोड़ गई, जिसके लिए ग्राम प्रधान एवं स्थानीय नागरिक जिम्मेदार है, क्यूँकि क्षेत्र के किसी भी संभ्रांत नागरिक ने चालक-परिचालक के खाने और रहने की उचित मूल्य दर सुविधा पर गौर नहीं किया।  
इस का ताज़ा-तरीन उदाहरण ये है कि देहरादून से खिर्सू के लिए अक्तूबर के पहले सप्ताह में उत्तराखंड परिवहन निगम बस सेवा शुरू हुई थी। लेकिन 17 अक्तूबर को बस सेवा बंद कर दी गई। रोडवेज प्रबंधन का कहना है कि ड्राइवर-कंडक्टर को प्रति व्यक्ति 140 रुपये रात्रि भत्ता मिलता है। यह खाने और रहने के लिए दिया जाता है, मगर  खिर्सू में प्रति व्यक्ति के खाने और रहने पर 500 रुपये तक खर्च आ रहा है, जिसे ड्राइवर-कंडक्टर चुकाने में असमर्थ है, इसलिए बस सेवा बंद हो गई थी।
मगर कुछ समय बाद राजनैतिक दबाव के कारण देहरादून-खिर्सू सेवा का संचालन करना पड़ा। अब हालात ये है कि देहरादून-खिर्सू मार्ग पर कोई भी चालक -
परिचालक जाने को तैयार नहीं जो विभागीय कर्मचारियों के लिए सर-दर्द बना हुआ है। साथ ही संचालन से सम्बंधित अधिकारियो का कहना है कि ड्राइवर-कंडक्टर को सस्ते खाने और रहने की सुविधा नहीं मिल पा रही है, इसलिए बस सेवा किसी भी वक्त बंद हो सकती है। उधर डिपो सहायक महाप्रबंधक गजेंद्र सिंह कठैत का कहना है कि देहरादून-खिर्सू बस सेवा के संचालन में हमारी पूर्ण रूचि है मगर खिर्सू में यदि ड्राइवर-कंडक्टर के खाने-रहने की उचित व्यवस्था का ज़िम्मा स्थानीय नागरिक एवं ग्राम प्रधान ले तो बस सेवा सुचारु रहेगी।

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