पेंशनभोगियों को अब नहीं लगाने होंगे बैंक के चक्कर 

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Utkarshexpress.com देहरादून - भारत सरकार ने केन्द्र के पेंशनभोगियों के लिए डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र को बढ़ावा देने के लिए पिछले साल नवम्बर में एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया गया है। इसके तहत एंड्रॉइड मोबाइल फोन के माध्यम से जीवन प्रमाणपत्र जमा करने के लिए फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक शुरू की गई थी। अब पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग डिजिटल मोड के माध्यम से जीवन प्रमाणपत्र को बढ़ावा देने और फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक को लोकप्रिय बनाने के लिए देशभर में एक विशेष राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया गया है।

राजधानी देहरादून में हुए एक जागरूकता कार्यक्रम के जरिए उत्तराखंड में भी इस अभियान का शुभारंभ कर दिया गया है। इसके लिए केन्द्र सरकार की टीम अंडर सेकटरी सुभाष चन्द्र के अगुवाई में देहरादून पहुंची थी। पेशनर्स को घर बैठे प्रमाण पत्र जमा कराने की सुविधा मिले इसके लिए आज केंद्र सरकार की टीम ने देहरादून स्थित भारतीय स्टेट बैंक-एसबीआई की मुख्य शाखा में केंद्र सरकार के पेंशनभोगियों के लिए जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इसमें बड़ी सँख्या में पेंशनभोगी डिजिटल माध्यम से अपना जीवन प्रमाणपत्र जमा कराने पहुँचे। पहले जीवन प्रमाणपत्र भौतिक रूप में जमा करना पड़ता था और इसके लिए वृद्ध पेंशनभोगियों को घंटों बैंकों के बाहर कतारों में खड़ा रहना पड़ता था।
अब, यह घर बैठे आराम से एक बटन के क्लिक से संभव हो गया है। डिजिटल सुविधा शुरू करने पर पेशनर्स ने खुशी जाहिर करते  हुए केन्द्र सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह अच्छी कोशिश है सभी को इसका लाभ मिलेगा। वहीं कुछ पेशनर्स ने इस योजना को अधिक लोकप्रिय बनाने को लेकर महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए। केन्द्र से पहुंची टीम की अगुवाई कर रहे भारत सरकार के पेंशन और पेशनर्स वेल्फेयर विभाग में पर्सनल पीजी व पेशनर्स मंत्रालय में अंडर सेकटरी सुभाष चन्द्र ने कार्यक्रम में मौजूद सभी पेशनर्स को इस योजना की खूबियों से अवगत कराते हुए उनके सवालों के जवाब देने के साथ सुझाव भी नोट किये। अंडर सेकटरी सुभाष चन्द्र ने बताया कि मोबाइल द्वारा फेस ऑथेंटिकेशन के माध्यम से जीवन प्रमाणपत्र जमा करने की प्रक्रिया में, आधार संख्या, ओटीपी के लिए मोबाइल नंबर, पीपीओ नंबर, बैंक या डाकघर के साथ खाता संख्या के ब्यौरे आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि सभी पेशनर्स योजना से जुडें इसको लेकर व्यापक स्तर पर जनजागरूकता कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं।
 

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