ग़ज़ल -  रीता गुलाटी

 
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प्यास........ तेरे प्यार की यारा अगर हो जायेगी,
तब मिलन की रात भी फिर अब नजर हो जायेगी।

जान देकर हम चुकाये प्यार की कीमत अभी,
ये कहानी प्रेम की उस पल अमर हो जायेगी।

पास होकर दूर कितने अब वफा करना कभी,
फिर खुदा मेरे अजी खुद की बसर हो जायेगी।

दर्द आँखो मे बसा है दूर तुम जाना नही,
रात दिन सोचे यही सब को खबर हो जायेगी।

जब हुआ दीदार तेरा खुश बड़े हम हो गये,
प्यार वाली वो नजर यारा ठहर हो जायेगी।
-  रीता गुलाटी ऋतंंभरा, चण्डीगढ़ 
 

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