भुजंग प्रयात छंद - मधु शुक्ला

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सुबह शाम प्रभु को नमन कर रही हूँ,
रहे शांति घर में जतन कर रही हूँ।

रहे स्वास्थ्य अच्छा सभी का हमेशा,
इसी हेतु प्रतिदिन हवन कर रही हूँ।

लगा कर नये वृक्ष खाली जगह में,
शुरू उपवनों का चलन कर रही हूँ।

परस्पर बढ़े प्रेम सद्भाव जागे,
महानायकों का पठन कर रही हूँ।

मिले मान कैसे यहाँ नारियों को,
इसी बात पर मैं मनन कर रही हूँ।
 — मधु शुक्ला. आकाश गंगा नगर.
       सतना, मध्यप्रदेश .
 

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