परिवर्तन (लेख) - झरना माथुर 

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परिवर्तन जैसा कि नाम से ही विदित होता है बदलना। हम लोगो ने हिन्दुस्तान की धरती पे जन्म लिया है। जो कभी सोने की चिड़िया था, ऋषियों  मुनियों की धरती वाला देश जहाँ कहते थे दूध की नदियाँ बहती थी। प्रेम , भाई -चारा, विश्बास जो रिश्तों की बुनियाद होता था। सब बदल गया समय के साथ। अब हम लोग इतने आधुनिक हो गये है कि जीने का तरीका ही बदल गया है। सोच बदल गयी है। जिसने जीवन को एक नये रूप मे लाकर खड़ा कर दिया है।
 जहाँ  बहता था स्वच्छ निर्मल पानी उसे विसलेरी बना दिया। शुद्ध ठंडी हवा जो एयर कंडीशनर की बन गयी। स्वार्थ मे पेड़ काटकर घरों को फ्लैट बना दिया।जहाँ रहते थे कुटुम्ब मे, अलग अलग रहना सीखा दिया। माँ की रोटी मे जो स्वाद था उसे पिज़्ज़ा वर्गर बना दिया। जहां करते थे सब एक साथ मिलकर बातें  उन्हे फेसबुक और वॉट्सएप्प पकड…बना दिया।         - झरना माथुर, देहरादून , उत्तराखंड  

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