गीतिका (वाबाला छंद) - मधु शुक्ला

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जन्म उनका हुआ एक घर है,
पर नहीं एक होती डगर है।

गृह पिता के रहे मात्र भाई,
ब्याह जाती बहन पर शहर है।

रीत संसार की बन गई यह,
भ्रात रखता बहन की खबर है।

भ्रात से मायका है बहन का,
माँ पिता की निशानी उधर है।

प्रेम अनमोल भाई बहन का, 
प्रीत इनकी जगत में अमर है।
✍️ मधु शुक्ला. सतना, मध्यप्रदेश .
 

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