ग़ज़ल -  डॉ. अशोक ''गुलशन' 

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हर मुसीबत की घड़ी में बेटियाँ मुस्कान हैं,
देवियों का रूप हैं ये बेटियाँ वरदान है। 

देखना चाहो तो इनको हर नज़र से देख लो,
बेटियाँ हैं माँ-बहन तो बेटियाँ भगवान हैं।

भूलकर भी बेटियों पर वार मत करना कभी,
फूल सी कोमल हैं ये तो लौह सा बलवान हैं।

बेटियाँ सरयू हैं यमुना और ये भागीरथी ,
हैं यही गीता और ये बाइबिल कुरआन हैं।

तुम सदा ही मान रखना पूजना इनको सदा ,
बेटियाँ हैं शान अपनी मान हैं सम्मान हैं।

बेटियाँ हैं तो धरा है और ये आकाश है,
है इन्हीं से सृष्टि ''गुलशन'' ये सभी की जान है।
 डॉ. अशोक ''गुलशन' उत्तरी कानूनगोपुरा, बहराइच (उ०प्र०)
 

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