प्रणय गीत -- अनुराधा पाण्डेय 

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मौन का आशय बता दो,
या मुखर हो बोल दो ना ।

प्रिय ! तुम्हारे इस अबोले
से कहीं फटकार अच्छी ।
नेह सिंचित -सी तुम्हारी,
वाक् असि की धार अच्छी ।
चाहता गुण-दोष मेरे----
तुम समेकित तोल दो ना ।
मौन का आशय बता दो,
या मुखर हो बोल दो न ।

हर्ष ही देते मुझे हैं,
तीक्ष्ण या मृदु स्वर तुम्हारे ।
स्नात करते प्राण मन को,
प्रेममय निर्झर तुम्हारे ।
चुप न बैठो ,क्लांत चित है,
कंठ से रस घोल दो ना ।
मौन का आशय बता दो,
या मुखर हो बोल दो ना ।

क्रोध यदि मुझ पर तुम्हारा,
बोल दो मनुहार कर लूँ ।
एक लघु जीवन मिला है,
क्यों न जी भर प्यार कर लूँ ।
बांध लो आलिंगनों में---
बांह अपनी खोल दो न ।
मौन का आशय बता दो,
या मुखर हो बोल दो ना ।
- अनुराधा पाण्डेय, द्वारिका, दिल्ली

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