मां हंसवाहिनी विद्यादायिनी - कालिका प्रसाद 

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मां हंसवाहिनी विद्यादायिनी,
हम  पर  अपनी कृपा  करो,
जीवन से अज्ञानता को हर दो,
शिक्षा का   वरदान   दे  दो।

शिक्षा से  ही  मिलती  है,
जीवन की  सारी  उन्नति,
शिक्षा  में ही  निहित  है,
खुशियों की  सारी  कुँजी।

वर दो  ही   वीणावादिनी,
धीरज , संयम  और  धैर्य,
अरज तुमसे यही विनोदिनी,
सदा  हो हमारे नेक विचार।

मां बिना ज्ञान का ये जीवन, 
लगे  दिशा    और    व्यर्थ,
तेरी करुणा  से   ही   मिले,
मां जीवन  का   सही अर्थ।

अज्ञान  के  तिमिर  से  है,
हम  सब  हो  रखे  है अंधे,
मां दे   दो ज्ञान  चक्षु हमको
हम सब है  मां तेरे ही   बंदे।
- कालिका  प्रसाद  सेमवाल
मानस सदन अपर  बाजार
रुद्रप्रयाग,  उत्तराखंड
 

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