नया साल - झरना माथुर 

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समय के चक्र के साथ वक़्त भी ये बदल रहा है,
पुराना साल अब नये साल मे ये बदल रहा है।

दिलों में होगी नई उमंग और नई तरंग होगी,
क्योंकि अब सब जो नूतन वर्ष में ये बदल रहा है।

इंसां  के चेहरे पे छायी है आशा की किरणे,
निराशा से भरा मन उत्साह में ये बदल रहा है।

पूरे होंगे युवाओं के नये विचार और सपने ,
हिंदुस्तान अब पुनर्निर्माण मे जो ये बदल रहा है।

चारों ओर होगी बस खुशियों से भरी हरियाली,
अब अन्त जो नये आरम्भ मे ये बदल रहा है।

लिखे जायेंगें नये गीत और नये फसाने भी,
जो आज है वो अब इतिहास में ये बदल रहा है।
झरना माथुर, देहरादून
 

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