प्रवीण प्रभाती - कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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शिव शंभु अति भले, लिपटे नाग हैं गले,
कंठ में गरल धारे, अभिषेक कीजिये।
चंदा भाल पर सोहे, जटाओं में गंगा मोहे,
संग में विराजें गौरी, सुधा रस पीजिये।
नंदी जी की है सवारी , जटाजूट वह धारी,
अंग भस्म सजती है, आशीर्वाद दीजिये।
नीलकंठ अविनाशी, कहलाते हैं कैलाशी
शंभु परिवार का ही, नित्य नाम लीजिये।
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दिन है बजरंग का, भावमय उमंग का,
भक्ति रस तरंग का, गुणगान कीजिये।
सज्ञभ दिन मना रहे, ध्यान मन लगा रहे,
छवि हिय सदा रहे, आशीर्वाद दीजिये।
चालीसा का पाठ कर, हनुमान ध्यान धर,
सांग राम नाम आप, जाप कर लीजिये।
कृपा सदा बनी रहे, छत्रछाया तनी रहे,
भक्ति नित घनी रहे, सुधा रस पीजिये।
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सर्व विघ्न दूर करें, संकट भक्तों के हरें,
गौरी सुत जीवन के, दुख हर लीजिये।
विघ्नहारी श्री गणेश, तात आपके महेश,
भक्तों के सर्व कलेश, छूमंतर कीजिये।
गौरी के पूत आप, बड़ा अद्भुत  प्रताप,
जग के संताप देख , प्रभु जी पसीजिये।
दान देते विद्या बुद्धि, मानस की करें शुद्धि,
जगा के  विवेक नित्य, भक्ति ज्ञान दीजिये।
- कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा, उत्तर प्रदेश

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