प्रवीण प्रभाती - कर्नल प्रवीण त्रिपाठी 

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शब्द पड़ें जब कान में, जागे तभी विवेक।
असर प्रभावी शब्द का, नामी बने अनेक।।

हृदय कपट मत राखिये, कुंद करे यह बुद्धि।
निश्छलता मन में बसे, हो अंतस की शुद्धि।।

बीज  प्रेम  के  रोपिये,  बढ़  जाये  सद्भाव।
जो शुचिता उर में धरे, उसका पड़े प्रभाव।।

हो पावन अन्तःकरण, जिसके मुख हरि नाम।
ऐसे प्राणी का भला, बने नहीं क्यों काम।।

काया तो नश्वर यहां, आत्मा परम पवित्र।
सुनने में है अटपटी, पर है बात विचित्र।।

धर्म-कर्म मत भूलिये, जो सुख का आधार।
पूजें नित निज इष्ट जो,  करवाते भव पार।।

दिन को शुभ करना अगर, रखिये शुद्ध विचार।
करिये औरों से सदा, विनय पूर्ण व्यवहार।।

अच्छा हो यदि आचरण, बनता सभ्य समाज।
पालन नियमों का करें, पायें तभी सुराज।।

अविष्कार  करके सदा, करे तरक्की रोज।
इसीलिये ही तो मनुज, करता नित नव खोज।।
- कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा/उन्नाव उत्तर प्रदेश
 

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