प्रवीण प्रभाती - कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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विकट समय है आजकल, रहा नहीं विश्वास।

द्वेष आपसी बढ़ रहा, शांति न आती रास।।

आज ज़रूरत  है यही,  मानस  बदलें  लोग।

अपनायें  शुचिता  तभी,  छूटेगा   यह  रोग।।

उत्पीड़न   को   रोकना,  हो   सबका   मंतव्य।

यह समाज भयमुक्त हो, जन जन का कर्तव्य।।

निर्बल का  शोषण करें, उचित नहीं  यह काम।

हो  सशक्त  प्रत्येक  जन,  तभी  करें  आराम।।

मुश्किल से मुश्किल खड़ी, बाधा हो प्रत्यक्ष।

दृढ़ निश्चय के साथ ही, पाते अपना लक्ष्य।।

कंटक पथ पर जो चले, ईश उसी के साथ।

डगमग नैय्या हो कभी, भगवन थामें हाथ।।

साहस से यदि काम लें, सुगम बने तब राह।

लक्ष्य सिद्ध होता तभी, पूरी हो हर चाह।।

- कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा/उन्नाव, उत्तर प्रदेश

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