प्रवीण प्रभाती - कर्नल प्रवीण त्रिपाठी

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बिन सोचे छोटा-बड़ा, करिये नित सम्मान।
यश फैलेगा आपका, करें लोग गुणगान।।

नैतिकता की बात सब, करते हैं दिन रात।
मगर कर्म उलटे करें, राक्षस बनी जमात।।

असुरक्षित नर-नारियाँ, लुप्त चेतना आज।
ज्ञान-ध्यान बेकार है, कुत्सित बना समाज।।

अज्ञानी बन सर्वदा, करता मनुज विलाप।
तिमिर हृदय का दूर हो,  उपजे तभी प्रताप।।

ज्ञान ध्यान जप योग सँग, मर्यादित आचार।
सुखमय जीवन ये करें, बन अनुपम आधार।।

कंटक पथ पर जो चले, ईश उसी के साथ।
*डगमग नैय्या हो कभी, भगवन थामें हाथ।।
- कर्नल प्रवीण त्रिपाठी, नोएडा/उन्नाव, उत्तर प्रदेश
 

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