शब्द की महिमा अपरम्पार- कालिका प्रसाद 

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शब्द से ही व्यक्ति की पहचान होती,
शब्द से  ही  रस   वर्षा  होती है,
शब्द से  ही  अनुराग  होता है,
शब्द से ही काव्य का श्रृंगार होता है।

शब्द में  नित्य  मधुरस घोलना है,
शब्द  में  बाण नहीं  होने चाहिए,
शब्द का प्रयोग  मनन करके बोल,
शब्द में बस मिश्री घोलना चाहिए।

शब्द में अंगार  नहीं  होना चाहिए,
शब्द को तौल कर बोलना चाहिए,
शब्द  पुलकित  करने   वाले हो,
शब्द में फूल ही फूल होने चाहिए।

शब्द में   प्यार  की  भाषा  हो,
शब्द में  बैराग  होना  चाहिये,
शब्द मन में अनुराग की गंगा बहाये,
शब्द से तन मन प्रफुल्लित होते है।

शब्द धन  अनमोल  धरोहर है,
शब्द का सुन्दर चयन करना होगा,
शब्द में  दिल  के  भाव होते है,
शब्द की  जय-जय  होती है।

शब्द में आत्मीयता होनी चाहिए,
शब्द में शालीनता होनी चाहिए,
शब्द में लालित्या होना चाहिए,
शब्द    ब्रह्म      होता    है।
- कालिका प्रसाद सेमवाल
मानस सदन अपर बाजार
रुद्रप्रयाग  उत्तराखंड
 

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